Sunday, 18 January 2015

अपना ज़मीर हम दाग दार नहीं करते !

अपना ज़मीर हम दाग दार नहीं करते ! 
हम मुसलमान है लाशो का व्यापार नहीं करते !

हम अपनी ही नहीं गैरो कि बेटिओ कि भी हिफाज़त करते है !

हम संत आशाराम जैसे चमत्कार नहीं करते !

उठा कर किसी कि मज़बूरी का फायदा !

बहु 'बेटिओ के साथ बलात्कार नहीं करते !

वे और होंगे जो उजाड़ दिया करते है गुलशन !

मुसलमान कभी गुल के खार नहीं करते !

क्यों दे हम किसी को देश भक्ति का सबुत !

हम हिन्द कि इज़्ज़त को तार तार नहीं करते !

हम शेर ए मोहम्मदी है !

ये जान लो !

हम सीने पे करते है चुपके वार नहीं करते !

तुम्हारी कलम उगलती है सिर्फ नफरत का ज़हर !

मगर हम अपनी कलम कि स्याही बेकार नहीं करते !

सियासतों के लिए काट देते हो अपनों का गला !

होता नहीं फिर भी तुम्हारा भला !

हम बादशाह थे !
बादशाह है !
और बादशाह रहेंगे !

हम तुम्हारी कुर्सियों का खुद को तलबग़ार नहीं करते !

वक़्त आया तो हिन्द के लिए लगा देंगे जान कि बाज़ी !

हम मुस्लमान है इंकार नहीं करते !!!!!